“अब सम्मान और न्याय का बजट चाहिए”: पेंशनरों की उम्मीदें 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र पर टिकी — वीरेन्द्र नामदेव

रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा है कि 23 फरवरी से प्रारंभ हो रहा विधानसभा बजट सत्र लाखों पेंशनरों के लिए आशा और न्याय का अवसर है। जिन कंधों ने राज्य निर्माण की जिम्मेदारी निभाई, आज वही पेंशनर अपने अधिकारों की प्रतीक्षा में हैं। अब समय आ गया है कि सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा हेतु ठोस निर्णय ले। उन्होने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशनरों को केंद्र के समान 3% महंगाई राहत (डीआर) जुलाई 2025 से एरियर सहित प्रदान की जाए। साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बंगाल प्रकरण में दिए गए निर्णय के अनुरूप 81 माह के लंबित महंगाई राहत एरियर का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। यह केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि लाखों वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और जीवन-निर्वाह से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने यह भी मांग की कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के अंतर्गत राज्य को हुए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की भरपाई के संबंध में स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए तथा इस गंभीर विषय में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। महासंघ ने बजट में निम्न प्रमुख मांगों को शामिल करने की अपेक्षा जताई है सभी जिलों में पृथक पेंशन कार्यालयों की स्थापना। परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की अधिसूचना दिनांक 30 सितंबर 2021 के अनुसार राज्य के भीतर वरिष्ठ नागरिकों को बस यात्रा किराया में छूट का प्रभावी क्रियान्वयन। मंत्रालय में प्रवेश व्यवस्था सरल बनाते हुए सभी शासकीय एवं सार्वजनिक संस्थानों में पेंशनरों के लिए विशेष सुविधा काउंटर की व्यवस्था। पेंशनर कल्याण निधि के बजट में पर्याप्त वृद्धि। वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग की स्थापना। प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सेट) की पुनर्स्थापना कर त्वरित एवं सुलभ न्याय सुनिश्चित करना। प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने जानकारी दी कि उपरोक्त मांगों के संबंध में आज ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी को ई-मेल एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से विस्तृत पत्र प्रेषित किया गया है, ताकि सरकार बजट सत्र में इन मांगों पर गंभीरता से विचार करे। महासंघ के पदाधिकारियों क्रमशः वीरेन्द्र नामदेव, जे. पी. मिश्रा, अनिल गोल्हानी, टी. पी. सिंह, बी. एस. दसमेर, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, आर. जी. बोहरे, ओ. डी. शर्मा, हरेंद्र चंद्राकर, लोचन पांडेय, एम. एन. पाठक, आर. के. टंडन, आर. के. नारद, नरसिंग राम, अनिल पाठक, शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, अनिल तिवारी, कौशलेंद्र मिश्रा, टी. एल. चंद्राकर, आर. के. दीक्षित, मालिक राम वर्मा, राम खिलावन साहू एवं कैलाश राव ने एक स्वर में कहा कि यह बजट सत्र पेंशनरों के लिए निर्णायक साबित होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस बार भी पेंशनरों की उपेक्षा की गई तो संगठन राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए बाध्य होगा। साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार संवेदनशीलता और न्यायप्रियता का परिचय देते हुए पेंशनर हित में ऐतिहासिक निर्णय लेगी, ताकि लाखों वरिष्ठ नागरिकों के चेहरे पर संतोष और सम्मान की मुस्कान लौट सके।

फ़रवरी 21, 2026 - 13:53
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“अब सम्मान और न्याय का बजट चाहिए”: पेंशनरों की उम्मीदें 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र पर टिकी — वीरेन्द्र नामदेव