*बरगा में वार्षिकोत्सव एवं भव्य मातृ-पितृ पूजन दिवस का गरिमामय आयोजन*

*नव पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कारों से समृद्ध करना भी आवश्यक* बेमेतरा— आज के दौर में जहाँ 14 फरवरी को आधुनिकता के नाम पर प्रेम दिवस के रूप में देखा जाता है, वहीं भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि सच्चा, निष्काम और पवित्र प्रेम वह है जो हमें जन्म देने वाले माता-पिता के चरणों में निहित है। जिस माता ने हमें जन्म देने से पूर्व अनगिनत प्रार्थनाएँ कीं, मंदिरों में माथा टेका और अपने सुखों का त्याग किया, जिस पिता ने अपना जीवन संतान के भविष्य के निर्माण में अर्पित कर दिया — उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना ही वास्तविक प्रेम है। भारतीय परंपरा “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” के आदर्श को आत्मसात करते हुए प्रत्येक घर में मातृ-पितृ पूजन का संस्कार विकसित करने की प्रेरणा देती है। इसी पावन भावना को साकार करते हुए ग्राम बरगा स्थित बाल संस्कार शिशु मंदिर विद्यालय में मंगलवार को वार्षिकोत्सव एवं भव्य मातृ-पितृ पूजन दिवस अत्यंत गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। विद्यालय परिसर आकर्षक सजावट से सुसज्जित रहा तथा बड़ी संख्या में अभिभावक, ग्रामीणजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। *भारतीय संस्कृति के साथ छत्तीसगढ़ी लोकधारा की अद्भुत प्रस्तुति* वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने देशभक्ति, सांस्कृतिक एवं भक्तिमय कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ अंचल की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक ने दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों ने जंवारा गीत, होली गीत, सरगुजिया-बस्तरिहा गीत, चंदैनी गीत, देवारगीत एवं सुवागीत जैसे पारंपरिक लोकगीतों एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुति देकर सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक में आधुनिक समय में मोबाइल के दुष्प्रभाव पर सारगर्भित संदेश दिया गया, जिसने उपस्थित अभिभावकों को चिंतन हेतु प्रेरित किया। *अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति* कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गंगाधर साहू (नवोदय विशेषज्ञ) उपस्थित रहे। अध्यक्षता विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्रवण कुमार साहू ने की। विशिष्ट अतिथियों में पीलुराम साहू (संकुल समन्वयक हांटरांका), कन्हैया लहरे (प्रधान पाठक बरगा), डॉ. सुशील श्रीवास, हेमंत साहू (शिक्षक), वीरसिंह साहू एवं अजय साहू (अजय क्लासेस) सम्मिलित हुए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रवण कुमार साहू ने कहा "बाल संस्कार शिशु मंदिर का उद्देश्य विद्यार्थियों का केवल शैक्षणिक विकास नहीं, बल्कि उनके नैतिक, सांस्कृतिक एवं चारित्रिक विकास को सुनिश्चित करना है। शिक्षा तभी सार्थक है जब उसमें संस्कार और चरित्र का समावेश हो। नव पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कारों से समृद्ध करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।" मुख्य अतिथि गंगाधर साहू ने विद्यालय परिवार की सराहना करते हुए कहा कि बाल्यावस्था में दिए गए संस्कार ही जीवन की मजबूत नींव होते हैं और यह विद्यालय क्षेत्र में संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान कर समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। *सामूहिक मातृ-पितृ पूजन: भावनाओं से भरा पावन दृश्य* कार्यक्रम के दूसरे चरण में सामूहिक रूप से मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया गया। विद्यार्थियों ने विधिवत अपने माता-पिता का पूजन कर उनके चरण स्पर्श किए एवं परिक्रमा की। यह दृश्य अत्यंत भावुक एवं हृदयस्पर्शी रहा। अनेक अभिभावकों की आँखें गर्व और प्रसन्नता से नम हो उठीं। मातृ-पितृ पूजन महोत्सव में बलराम भाई भोरमदेव, राधेश्याम (प्रधान पाठक पदमी), मोहन (शिक्षक बेरला), अनुप भाई बेमेतरा, अयोध्या प्रसाद यदु, प्रदीप कुमार यदु बेमेतरा, कीर्ति भाई बहेरा एवं खोमेंद्र सिन्हा थानखम्हरिया की विशेष भूमिका रही। *उत्कृष्ट विद्यार्थियों का सम्मान* कार्यक्रम के अंतिम चरण में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों के करकमलों से सम्मानित किया गया। नवोदय विद्यालय में चयनित विद्यार्थियों, खेल के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता करने वाले छात्र-छात्राओं सहित अन्य प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान किए गए। इस सम्मान समारोह ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया। *शिक्षकगण का सराहनीय योगदान* इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकगण — राजेंद्र निषाद, अनुराधा यादव, रोमा निषाद, सीता लहरे, गायत्री साहू, गीतेश्वरी साहू, तिलेश्वरी साहू, पूर्णिमा साहू, सरोज साहू एवं दिव्या साहू — का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन संस्था प्रमुख डॉ. रेवाराम पाल द्वारा किया गया।

फ़रवरी 11, 2026 - 20:49
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