रायपुर मुख्यालय मे 03 दिवसीय सुनवाई में 68 प्रकरण हुए समाप्त

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 177 वी. एवं रायपुर जिले में 363 वी. जनसुनवाई की गई। लगातार तीन दिवसीय जनसुनवाई में रायपुर मुख्यालय में 150 प्रकरणों में निराकरण किया गया। जिसमें 68 प्रकरण समाप्त हुए। एक प्रकरण में ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल की 13 नर्सों ने महिला आयोग मे अलग-अलग कुल 13 प्रकरण दर्ज कराया है। जिसमें आवेदिकागणों ने बताया कि उनका अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी के माध्यम से ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल, रायपुर के माध्यम से नर्सिंग आॅफिसर के रूप में दो वर्ष पूर्व नियुक्ति हुई थी, जिनका वेतन 40 हजार से 48 हजार रू. तक है। परंतु उन्हें वेतन का आधा पैसा ही प्राप्त होता है और इसमें अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी, ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल एवं यूको बैंक डी.डी. नगर की संलिप्तता से हमारे साथ धोखाधड़ी हो रहा है। जब भी वेतन आता है तो एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा उनका आधा वेतन निकाल लिया जाता है। आवेदिका ने बताया कि बैंक से वेतन निकलने के दिन बैंक मैनेजर के साथ कांटेªक्टर भी बैठे रहते है। इसलिए जैसे ही आवेदिकागणों के खाते में वेतन का मैसेज आने के अगले ही मिनट में उनके खाते से पैसा निकलने का मैसेज भी आ जाता है। आवेदिकागणों के अनुसार अनावेदकगणों की आपसी सांठगांठ से लगभग 70-80 लाख रू. का वेतन घोटाला किया गया है। आवेदिकागणों का 2 वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र भी अब तक नहीं मिला है। आयोग द्वारा अनावेदकगणों को निर्देशित किया कि आगामी सुनवाई में आवेदिकागणों का अनुभव प्रमाण पत्र लेकर उपस्थित हो व अन्य अनावेदकगणों की उपस्थिति पुलिस अधीक्षक के माध्यम से आवश्यक रूप से कराये जाने का निर्देश आयोग द्वारा दिया गया, ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके। इसी प्रकरण के दूसरे दिन के सुनवाई में आयोग ने अनावेदकगणों को आदेशित किया था कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करें व सीसीटीवी फुटेज लेकर आवश्यक रूप से उपस्थित हो, आज की सुनवाई मे अनावेदकगण जानबूझ कर सुनवाई मे अनुपस्थित थे इन सब के खिलाफ टाटीबंध के थाना प्रभारी को शोकाॅज नोटिस जारी कर आगामी सुनवाई में अनावेदकगणों की आवश्यक उपस्थिति का निर्देश आयोग द्वारा दिया गया। अनावेदक ब्रांच मैनेजर आयोग मे उपस्थित हुआ और आयोग द्वारा मांगे गये सीसीटीवी फुटेज देने के लिए तैयार हुआ। आवेदिका ने बताया कि सैलेरी अकाउंट मे आने का मैसेज आते ही तुरंत अकाउंट से नाममात्र राशि छोड़कर अधिकांश राशि 1-2 मिनट के अंतराल में निकाल लिया जाता था। आवेदिकागणों को अंदेशा है कि चारो अनावेदक ब्रांच मैनेजर के साथ मिलकर डीडी नगर युको बैंक के एटीएम से ही आवेदिकागणों की तनख्वा लगातार निकालते आ रहे है। अनावेदक ब्रांच मैनेजर को आयोग द्वारा आदेशित किया गया कि सीसीटीवी फुटेज 10 दिन के अंदर आयोग को प्रेषित करें। समस्त अनावेदकगणों को पुलिस कमिश्नर के माध्यम से आवश्यक उपस्थिति कराये जाने का आदेश भी आयोग द्वारा दिया गया ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके। सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों द्वारा आवेदिका का विवाह उसके पति के स्वास्थ्य संबंधी उचित तथ्यों को छुपाकर धोखे में रखकर किया गया व आवेदिका के पति की मृत्यु 2024 मे होने के बाद ससुराल पक्ष वालों ने आवेदिका को त्याग दिया। आवेदिका ने इस पर आयोग मे शिकायत की थी। उभय पक्ष को विस्तार से सुना गई व आयोग की समझाईश पर अनावेदकगणों ने आवेदिका को शादी मे दिये गये गहने, समस्त सामान, 2 लाख रू. नगद वापस करने के और 3 लाख रू. एक मुश्त भरण-पोषण देने के लिए तैयार हुए। दिनांक 11/02/2026 को आयोग के दिये निर्देशानुसार आवेदिका को विवाह के अवसर पर दिये गये मायके व ससुराल पक्ष के समस्त स्त्रीधन, 2 लाख व 3 लाख के चेक, आवेदिका को आयोग के सदस्य व कार्यालयीन स्टाफ के समक्ष प्रदान किया गया व प्रकरण नस्तीबध्द किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदिकागण आपस मे सगी बहने है। आवेदिका ने महासमुंद के अयोध्या नगर मे स्वअर्जित सम्पत्ति से जमीन खरीदकर मकान बनाया, जिस समय जमीन खरीदी गई थी उस समय आवेदिकागण 20-22 वर्ष से कम उम्र के थे। मकान आवेदिका के नाम पर है। उभय पक्ष को विस्तार से सुना गया आवेदिका का कहना है कि अनावेदिकागण ने घर बनाने के लिए 5 लाख रू. आवेदिका को दिया था वह जानती है कि मालिकाना हक आवेदिका के नाम पर है। आयोग ने समझाईश दिया कि अनावेदिकागण यदि चाहे तो गवाही के साथ अपने द्वारा लगाये गये पैेसे को प्रमाणित करें उसके लिए न्यायालय मे दावा कर सकती है लेकिन आवेदिका के मालिकाना हक से इंकार नहीं कर सकती। ओवदिका अपनी सम्पत्ति में जा कर रहने व मनचाहे तरीके से उस सम्पत्ति का उपयोग कर सकती है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने आयोग में सामाजिक बहिष्कार किये जाने की शिकायत की थी। आवेदिका ने अपने ससुर की अर्थी को कंधा दिया था, जिसके लिए आवेदिका के समाज के तत्कालीन अध्यक्ष ने ग्राम प्रबंधक को एक पत्र जारी किया था कि आवश्यक संज्ञान लेकर महासभा को अवगत करावें। आवेदिका ने अनुसूचित जाति- जनजाति आयोग मे भी प्रकरण प्रस्तुत किया अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने भी निराकरण किये जाने का उल्लेख दस्तावेज मे मौजूद है इस तथ्य को आवेदिका ने महिला आयोग से छुपाया। अनावेदकगणों को समझाईश दिया गया की वह समाज से किसी को भी बहिष्कृत नहीं कर सकते है। अनावेदकगणों ने कहा कि उनके समाज के नियमावली में बहिष्कृत करने का प्रावधान ही नहीं हैं। आवेदिका के पास भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि उसे बहिष्कृत किया गया। आवेदिका को निर्देशित किया गया कि स्पष्ट प्रमाण होने की स्थिति में आवेदिका समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ अपने कानूनी अधिक

फ़रवरी 12, 2026 - 17:19
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रायपुर मुख्यालय मे 03 दिवसीय सुनवाई में 68 प्रकरण हुए समाप्त
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