12 नर्सों का लगभग 70-80 लाख रू. का वेतन घोटाला, अनावेदकगणो को पुलिस के माध्यम से उपस्थित कराने का निर्देश

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, श्रीमती सरला कोसरिया, सुश्री दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 175 वी. एवं रायपुर जिले में 361 वी. जनसुनवाई की गई। आज के एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि 2013 में अनावेदक से विवाह किया था। 03 साल के बाद वह अलग रह रही है। इस दौरान अनावेदक ने अन्य महिला से विवाह कर लिया, जिससे उनकी संतान भी है। दोनो पक्ष के मध्य कुटुंब न्यायालय मे भरण-पोषण का मामला निराकृत हो गया है ऐसी स्थिति में प्रकरण नस्तीबध्द किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका की मंा की मृत्यु वर्ष 2011 में हुई अनावेदक आवेदिका का बड़ा भाई है उसका विवाह 2014 में हुआ। आवेदिका को अपनी मां के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति 2013 में मिली। इस बात को लगभग 13 वर्ष हो गये। आवेदिका का भाई आवेदिका की अनुकंपा नियुक्ति पर आवेदिका को परेशान कर अपनी पत्नी को आवेदिका के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए प्रयासरत् है। आवेदिका की मां की मृत्यु दिनांक तक तथा आवेदिका के अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने के दिनांक तक अनावेदक(भाई) की पत्नि का अस्तित्व इस परिवार में नही था। अतः उसे अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता है या नहीं इसका निराकरण संबंधित प्रशासनिक अधिकारी ही कर सकते हैं। आयोग ने अनावेदक को निर्देेश दिये कि इस हेतु वह नियमानुसार कार्यवाही कर सकता है लेकिन आवेदिका को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परेशान ना करें, यदि अनावेदक द्वारा आवेदिका को परेशान किया गया तो आवेदिका न्यायालिन प्रक्रिया का सहारा ले सकती है। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उभय पक्ष आपस में पति-पत्नि है और दोनो की दो बेटियां 3 वर्ष व डेढ वर्ष है। आवेदिका ने खुलानामा के माध्यम से आवेदिका ने अनावेदक से तलाक लिया। खुलानामा के एग्रीमेंट में यह लिखा गया कि 3 वर्ष की बच्ची अनावेदक व डेढ वर्ष की बच्ची आवेदिका के पास रहेगी। 12 अक्टूबर 2025 से इसका पालन दोनो पक्ष कर रहे है। आवेदिका ने आयोग में 3 वर्षीय पुत्री से ना मिलने दिये जाने की शिकायत की हैं इसी तरह अनावेदक भी अपनी डेढ वर्षीय पुत्री से अब तक नहीं मिला है। आयोग द्वारा दोनो पक्षों को समझाईश दिया गया कि महिने में दो बार दोनो आयोग में उर्पिस्थत होकर बच्चों से मिलेंगे। आयोग ने कहा कि नियमित रूप से बच्चों को लेकर उपस्थित होंगे इसकी निगरानी नियमित रूप से 06 माह तक आयोग द्वारा किया जायेगा। एक प्रकरण में सुनवाई के दौरान पता चला की ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल की 13 नर्सों ने महिला आयोग मे अलग-अलग कुल 13 प्रकरण दर्ज कराया है। जिसमें आवेदिकागणों ने बताया कि उनका अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी के माध्यम से ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल, रायपुर के माध्यम से नर्सिंग आफिसर के रूप में दो वर्ष पूर्व नियुक्ति हुई थी, जिनका वेतन 40 हजार से 48 हजार रू. तक है। परंतु उन्हें वेतन का आधा पैसा ही प्राप्त होता है और इसमें अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी, ई.एस.आई.सी. हाॅस्पिटल एवं यूको बैंक डी.डी. नगर की संलिप्तता से हमारे साथ धोखाधड़ी हो रहा है। जब भी वेतन आता है तो एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा उनका आधा वेतन निकाल लिया जाता है। आवेदिका ने बताया कि बैंक से वेतन निकलने के दिन बैंक मैनेजर के साथ कांटेªक्टर भी बैठे रहते है। इसलिए जैसे ही आवेदिकागणों के खाते में वेतन का मैसेज आने के अगले ही मिनट में उनके खाते से पैसा निकलने का मैसेज भी आ जाता है। आवेदिकागणों के अनुसार अनावेदकगणों की आपसी सांठगांठ से लगभग 70-80 लाख रू. का वेतन घोटाला किया गया है। आवेदिकागणों का 2 वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र भी अब तक नहीं मिला है। आयोग द्वारा अनावेदकगणों को निर्देशित किया कि आगामी सुनवाई में आवेदिकागणों का अनुभव प्रमाण पत्र लेकर उपस्थित हो व अन्य अनावेदकगणों की उपस्थिति पुलिस अधीक्षक के माध्यम से आवश्यक रूप से कराये जाने का निर्देश आयोग द्वारा दिया गया, ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके। एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि काॅलेज प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग आकर आवेदिका की बेटी ने आत्महत्या कर ली। काॅलेज प्रबंधन द्वारा घटना को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सभी दस्तावेजों के आधार पर अनावेदकगणों से पूछताछ की गई किंतु संतुष्टिजनक जवाब नहीं मिला। अनावेदक ने सीसीटीवी की जांच साइबर से नहीं करायी गल्र्स हाॅस्टल में लड़का कब व कितने बजे कहा से घुसा उस पर ड्यूटी में कार्यरत् कर्मचारियों पर अनावेदकगणों ने क्या एक्शन लिया इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दिया गया। आयोग की पूछताछ के बाद यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि अनावेदकगण किन्ही तथ्यों को या तो छिपा रहे है या पूर्णतः स्पष्ट नहीं कर रहे है। कही ना कही हाॅस्टल में घुसने वाले लडके को बचाने का षड्.यंत्र अनावेदकगणों द्वारा किया जा रहा है। आयोग ने अनावेदकगणों को आदेशित किया कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करें व सीसीटीवी फुटेज लेकर आवश्यक रूप से उपस्थित हो, ताकि प्रकरण का निराकरण हो सके। एक अन्य प्रकरण में अनावेदक पति-पत्नि है। वह आवेदिका की एक ननंद है जो पिछले 2 वर्षों से आवेदिका के साथ उनके घर में निवास कर रही है तब से पति-पत्नि के मध्य मापसी मनमुटाव बढ गया है। जिससे उनके 14 वर्षीय पुत्र के पालन-पोषण व आपसी सामंजस्य में दिक्कते आ रही है। उभय पक्षों को विस्तार से सुना गया आवेदिका अनावेदक से तलाक चाहती है। आयोग ने समझाईश दिया कि मकान के 2 कमरों में अनावेदक व उसकी बहन व अन्य दो कमरों में आवेदिका व उसका पुत्र निवास करेंगे अपने पुत्र के लिए उभय पक्ष बराबर जिम्मेदार रहेंगे, जिससे उनके बीच सामंजस्य सुधर सकता है, ऐसा प्रयास करेंगें। जिसमें उभय पक्ष चाहें तो कुटुंब न्यायालय से अपने प्रकरण का निराकरण करा सकें

फ़रवरी 10, 2026 - 18:48
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12 नर्सों का लगभग 70-80 लाख रू. का वेतन घोटाला, अनावेदकगणो को पुलिस के माध्यम से उपस्थित कराने का निर्देश
12 नर्सों का लगभग 70-80 लाख रू. का वेतन घोटाला, अनावेदकगणो को पुलिस के माध्यम से उपस्थित कराने का निर्देश