मध्यप्रदेश से 10 हजार करोड़ की लेनदारी पर स्पष्टीकरण नहीं, पेंशनरों में असंतोष

रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने राज्य बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि बजट भाषण में पेंशनरों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव रहा, जिससे पेंशनर वर्ग में निराशा व्याप्त है। उन्होंने बताया कि राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपने बजट भाषण के दौरान कहा कि पेंशन भुगतान का डिजिटलीकरण नहीं होने से अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। आठ माह के प्रयासों के बाद इसे पूर्ण रूप से डिजिटलीकृत किया गया है। इस प्रक्रिया में यह तथ्य सामने आया कि छत्तीसगढ़ सरकार को मध्य प्रदेश सरकार से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होना है, जो भविष्य में मिलने पर पेंशन भार में कमी लाएगी। श्री नामदेव ने प्रश्न उठाया कि इतनी बड़ी राशि की लेनदारी वर्षों तक लंबित कैसे रही? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह राशि कब और किस प्रक्रिया से प्राप्त होगी? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया, जिससे पेंशनरों में असंतोष है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य सरकार द्वारा शासकीय सेवकों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना लागू करने तथा इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने का महासंघ ने स्वागत किया है। किंतु पेंशनरों को इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किया जाना गंभीर अन्याय है। महासंघ का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी भी जीवन भर राज्य की सेवा करते हैं, अतः उन्हें इस सुविधा से वंचित रखना उचित नहीं है। महासंघ से जुड़े पदाधिकारियों — जे.पी. मिश्रा, अनिल गोल्हानी, टी.पी. सिंह, बी.एस. दसमेर, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, आर.जी. बोहरे, ओ.डी. शर्मा, हरेंद्र चंद्राकर, लोचन पांडेय, एम.एन. पाठक, नरसिंग राम, एम.आर. वर्मा, अनिल तिवारी, अनिल पाठक, शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, टी.एल. चंद्राकर, आर.के. नारद, शरद अग्रवाल, आर.के. टंडन, कौशलेंद्र मिश्रा, आर.के. दीक्षित, आर.के. साहू, बी.डी. मानिकपुरी, कैलाश राव, सी.एल. चंद्रवंशी, सोमेश्वर प्रसाद तिवारी, नागेन्द्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने बजट को पेंशनरों के लिए निराशाजनक बताया है। महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि पेंशनरों के लंबित मुद्दों—महंगाई राहत, एरियर भुगतान, स्वास्थ्य सुविधा और समान लाभ—पर शीघ्र ठोस निर्णय लेकर न्याय सुनिश्चित किया जाए।

फ़रवरी 24, 2026 - 16:14
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मध्यप्रदेश से 10 हजार करोड़ की लेनदारी पर स्पष्टीकरण नहीं, पेंशनरों में असंतोष