शनि प्रदोष व्रत: शिव जी के साथ शनि देव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा

पंडित यशवर्धन पुरोहित महाशिवरात्रि से ठीक एक दिन पहले 14 फरवरी को शनिवार के दिन शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में शनि प्रदोष को कष्ट निवारण, न्याय, धन प्राप्ति और जीवन में स्थिरता लाने का सर्वोत्तम अवसर बताया गया है। आइए जानते हैं इस व्रत के बारे में। 14 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत महाशिवरात्रि से ठीक एक दिन पहले पड़ रहा है, जो अपने आप में एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से शनि देव भी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में शनि प्रदोष को कष्ट निवारण, न्याय, धन प्राप्ति और जीवन में स्थिरता लाने का सर्वोत्तम अवसर बताया गया है। आइए जानते हैं इस व्रत की तिथि, महत्व और पूजा विधि। शनि प्रदोष और महाशिवरात्रि का दुर्लभ संयोग शनिवार को प्रदोष व्रत का संयोग महाशिवरात्रि से ठीक पहले पड़ना बहुत ही दुर्लभ है। शनिवार शनि देव का दिन होता है और प्रदोष काल शिव पूजा का समय। इस दिन शिव की पूजा करने से शनि देव स्वयं प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि शनि देव महादेव के परम भक्त और मानस पुत्र हैं। इस संयोग में व्रत और पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य ग्रह पीड़ा से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में स्थिरता, न्याय और धन की प्राप्ति के योग बनते हैं। शनि प्रदोष व्रत का महत्व और लाभ शनि प्रदोष व्रत रखने से शनि देव के कष्ट, देरी, मुकदमे, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव दूर होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिनकी कुंडली में शनि कमजोर या पीड़ित हो। इस दिन व्रत रखने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। करियर, व्यापार और नौकरी में स्थिरता आती है। कानूनी मामले और विवादों में विजय मिलती है। आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है। महाशिवरात्रि से पहले शनि दोष मुक्ति से शिव कृपा और भी शीघ्र प्राप्त होती है। शनि प्रदोष पर महादेव और शनि देव की पूजा विधि 14 फरवरी को प्रदोष काल में पूजा इस प्रकार करें: शाम को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिव मंदिर या घर के मंदिर में शिवलिंग और शनि यंत्र स्थापित करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं। 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जप करें। शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें। शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। गरीबों को काले चने या उड़द की दाल दान करें। व्रत के नियम और सावधानियां शनि प्रदोष व्रत में दिन भर फलाहार या सात्विक भोजन करें। नमक, अनाज, चावल और तामसिक भोजन से परहेज करें। क्रोध, झूठ और नकारात्मक सोच से दूर रहें। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें। अगर कुंडली में शनि पीड़ित है, तो ज्योतिषी से सलाह लेकर विशेष उपाय करें। संयोग का विशेष फल 14 फरवरी का शनि प्रदोष और 15 फरवरी की महाशिवरात्रि का संयोग दुर्लभ है। इस दिन व्रत और पूजा करने से शनि दोष से छुटकारा के साथ-साथ शिव कृपा भी प्राप्त होती है। रुके हुए कार्यों में गति आती है और जीवन में स्थिरता व सुख बढ़ता है। इस संयोग का लाभ उठाएं। शनि प्रदोष व्रत से शनि देव और महादेव दोनों प्रसन्न होते हैं। इस दिन पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

फ़रवरी 13, 2026 - 18:16
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शनि प्रदोष व्रत: शिव जी के साथ शनि देव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा