बजट में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी कोई कदम नहीं

महासमुंद कांग्रेस पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 2026 का बजट एक साफ़ संदेश देता है: गाँव, किसान और खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हैं। पहली बार ऐसा बजट, जिसमें किसान का नाम तक नहीं— न सिंचाई, न खाद, न खेतिहर मज़दूर। शेखी बघारते रहे कि विश्व में फलां नंबर की अर्थव्यवस्था हो गई, विश्व गुरु हो गए, पर बजट ने कलई खोल कर रख दी. पिछले साल यानी वर्ष 2025-26 में न राजस्व बढ़ा पाए, न टैक्स वसूली मज़बूत हो सकी. इस बार भी निर्मला सीतारमण जी के धुंआधार बजट में धुंआ बहुत है और धार बहुत पतली है. स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक विकास और ग्रामीण विकास से लेकर शहरी विकास तक हर क्षेत्र में कटौती ही कटौती. फसल बीमा, यूरिया सब्सिडी, ग़रीब कल्याण अन्न योजना से लेकर ग़रीबों को गैस योजना सब में कटौती कर दी गई है. यहां तक कि ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति सभी क्षेत्रों में कटौतियां कर दी गईं हैं. बच्चों की छात्रवृत्ति की राशि तक घटा दी है. न बढ़ती महंगाई का कोई उपाय, न बढ़ती बेरोज़गारी को रोकने का कोई प्रयास. न विदेशी हलचल से बाज़ार पर होने वाले असर को रोकने का कोई संकल्प. यह कटौती का बजट है. मोदी जी अब काटने में लग गए हैं. बांट तो वो पहले ही रहे थे. आगे डॉ रश्मि चंद्राकर ने कहा कि बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के लिए एक सवाल लेकर बैठा है। इस बजट में गरीब तबके के लिए कुछ नहीं है बजट में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं इकॉनमिक सर्वे दिखाता है कि व्यापार में अनिश्चितता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट इस समस्या को मुश्किल से ही स्वीकार कर रहा है रुपए की गिरावट से निपटने के लिए भी सरकार के पास कोई योजना नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल संकट ठहरा हुआ वेतन, कमजोर उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में सुस्ती है, लेकिन बजट में उपभोक्ता मांग को गति देने का कोई विचार नहीं दिखता है वहीं, इस बजट में कर्ज के बढ़ते बोझ पर भी ध्यान नहीं दिया गया है इस बजट में शिक्षित युवाओं में फैले व्यापक बेरोजगारी संकट के समाधान से जुड़ी कोई बात नहीं है सरकार ने पिछले साल के आवंटित बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सोशल जस्टिस जैसे कई जरूरी क्षेत्रों में पूरा बजट ही खर्च नहीं किया मोदी सरकार का नारा है- 'सबका साथ, सबका विकास', लेकिन बजट के आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा में पैसा खर्च नहीं किया और बजट भी पिछले साल के मुकाबले घटा दिया गया पहले की सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रों को स्कॉलरशिप पर ज्यादा जोर देती थीं। वित्त मंत्री ने एक भी बार स्कूलों का जिक्र नहीं किया और सामाजिक सुरक्षा और कल्याण को लेकर एक भी घोषणा नहीं की। इसके अलावा, मनरेगा की जगह आए नए कानून के बजट के बारे में कोई जिक्र नहीं किया ये एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है। पहले तो ये पैसा नहीं देना चाहते और ऊपर से मिले बजट को भी खर्च नहीं करते हैं नरेंद्र मोदी गुड गवर्नेंस की बात करते हैं लेकिन वे लोगों की भलाई के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहते। इसलिए मैं इस बजट को रिजेक्ट करती हूं। ये लोगों के हित में नहीं है और इसका लोगों के लिए कोई उपयोग नहीं है मोदी सरकार के इस बजट की घोषणा के बाद शेयर मार्केट गिर गया। हर क्षेत्र में यह सरकार विफल हो चुकी है। यह बजट गरीबों, युवाओं के हित में नहीं है। महंगाई कैसे कम होगी, रोजगार कैसे पैदा होंगे, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है

फ़रवरी 1, 2026 - 20:31
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बजट में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी कोई कदम नहीं