भारत में भी जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था पर पुनर्विचार हो — वीरेन्द्र नामदेव

रायपुर।भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने पड़ोसी देश श्रीलंका में सांसदों की आजीवन पेंशन समाप्त करने के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि भारत में भी जनप्रतिनिधियों की पेंशन एवं विशेष सुविधाओं की व्यवस्था पर गंभीर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि श्रीलंका की संसद ने राष्ट्रपति अनुराकुमारा दिसानायके के नेतृत्व में 49 वर्ष पुराने कानून को बहुमत से निरस्त करते हुए सांसदों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन समाप्त कर दी है। इस निर्णय को वहाँ की जनता ने जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना है। श्री नामदेव ने कहा कि राजनीति कोई “रिटायरमेंट प्लान” नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम है। जब देश के करोड़ों कर्मचारी और पेंशनर वर्षों की सेवा के बाद भी महंगाई और सीमित संसाधनों से जूझते हैं, तब जनप्रतिनिधियों को एक या दो कार्यकाल के बाद आजीवन पेंशन मिलना न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता। उन्होंने कहा कि भारत में सांसदों और विधायकों को वेतन, भत्ता, यात्रा सुविधा, आवास एवं अन्य विशेषाधिकार पहले से उपलब्ध हैं। ऐसे में आजीवन पेंशन की व्यवस्था पर पुनर्विचार समय की मांग है। यदि जनप्रतिनिधि वास्तव में सेवा भावना से राजनीति में आते हैं, तो उन्हें इसे त्याग और जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करना चाहिए, न कि लाभ के साधन के रूप में। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ केंद्र एवं राज्य सरकारों से आग्रह करता है कि देशहित, आर्थिक अनुशासन और सामाजिक समानता को ध्यान में रखते हुए जनप्रतिनिधियों की पेंशन एवं विशेष सुविधाओं पर व्यापक बहस प्रारंभ की जाए तथा आवश्यक हो तो संवैधानिक और विधिक संशोधन किए जाएँ। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के पदाधिकारी क्रमशः जे पी मिश्रा, अनिल गोल्हानी, बी एस दसमेर, टी पी सिंह, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, आर जी बोहरे, ओ डी शर्मा, हरेंद्र चंद्राकर, आदि ने कहा है कि इससे लोकतंत्र में नैतिकता और जवाबदेही की भावना मजबूत होगी तथा जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

फ़रवरी 25, 2026 - 18:04
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भारत में भी जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था पर पुनर्विचार हो — वीरेन्द्र नामदेव